2013 PYQ Test Lesson Content Q&A 40 Report a question What’s wrong with this question? You cannot submit an empty report. Please add some details. Total NO. of Questions: 63 Time: 40 Minutes Time’s up Please Submit the Test. राजनीति विज्ञान UP TGT PYQ 2013 1 / 63 अध्यक्षात्मक शासन का सैद्धान्तिक आधार है – उपर्युक्त में से कोई नहीं शक्तियों का संतुलन शक्तियों का एकीकरण शक्तियों का पृथक्करण अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली का सैद्धान्तिक आधार शक्तियों का पृथक्करण है। इसमें कार्यपालिका और विधायिका के बीच स्पष्ट विभाजन होता है, जिससे दोनों स्वतंत्र रूप से कार्य कर सकें। कार्यपालिका का प्रमुख विधायिका के प्रति उत्तरदायी नहीं होता, जिससे वह अपने कार्यों को स्वतंत्र रूप से संचालित कर सकता है। यह व्यवस्था शासन में दक्षता और स्थिरता लाने का प्रयास करती है। 2 / 63 वर्तमान में लोकसभा की बैठक के लिए क्या गणपूर्ति है? 57 सदस्यगण 55 सदस्यगण 56 सदस्यगण 54 सदस्यगण लोकसभा की बैठक के लिए गणपूर्ति (quorum) कुल सदस्य संख्या का एक-दसवां भाग होना आवश्यक है। वर्तमान में लोकसभा की प्रभावी सदस्य संख्या 545 मानी जाती है, अतः गणपूर्ति 55 सदस्यों की होती है। यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि सदन में पर्याप्त प्रतिनिधित्व के साथ कार्यवाही हो। गणपूर्ति के बिना सदन की कार्यवाही वैध नहीं मानी जाती। 3 / 63 धन विधेयक को परिभाषित किया गया है- अनु. 110 में अनु. 111 में अनु. 112 में अनु. 113 में धन विधेयक की परिभाषा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 110 में दी गई है। यह उन विधेयकों से संबंधित होता है जिनका संबंध कराधान, सरकारी व्यय या राजकोषीय विषयों से होता है। धन विधेयक केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जाता है और राज्यसभा इसमें केवल सुझाव दे सकती है। इससे वित्तीय मामलों में लोकसभा की प्रधानता स्पष्ट होती है। 4 / 63 निम्नलिखित कथनों में कौन सही है? लॉक ने सरकार और राज्य में विभेद किया है। लॉक ने सरकार और राज्य जैसे शब्दों में भ्रम उत्पन्न किया है। लॉक सरकार को राज्य से श्रेष्ठ मानता है। लॉक ने सरकार और राज्य में विभेद नहीं किया है। जॉन लॉक ने राज्य और सरकार के बीच स्पष्ट अंतर किया। उसके अनुसार राज्य की शक्तियाँ सीमित होती हैं और वह प्राकृतिक अधिकारों तथा प्राकृतिक कानूनों से बंधा रहता है। सरकार राज्य का एक अंग है, जो जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए कार्य करती है। इस प्रकार लॉक ने निरंकुश सत्ता का विरोध करते हुए राज्य और सरकार में स्पष्ट विभेद स्थापित किया। 5 / 63 निम्नलिखित में से मार्क्स के अनुसार कौन ऐतिहासिक परिवर्तन का प्रमुख कारक है? दल वर्ग व्यक्ति जनता कार्ल मार्क्स के अनुसार ऐतिहासिक परिवर्तन का मुख्य आधार वर्ग संघर्ष है। समाज में विभिन्न वर्गों के बीच हितों का टकराव होता है, जो परिवर्तन को जन्म देता है। मार्क्स का मानना था कि इतिहास का विकास आर्थिक संरचना और वर्गों के संघर्ष के कारण होता है। इस संघर्ष के माध्यम से समाज एक अवस्था से दूसरी अवस्था में परिवर्तित होता है। 6 / 63 सम्प्रभुता एक विशिष्टता है – राज्य की संसद की सरकार की जनता की सम्प्रभुता राज्य का एक अनिवार्य तत्व है, जिसके बिना राज्य की कल्पना नहीं की जा सकती। यह राज्य को आंतरिक रूप से सर्वोच्च तथा बाह्य रूप से स्वतंत्र बनाती है। आंतरिक दृष्टि से राज्य अपने क्षेत्र में सर्वोच्च शक्ति रखता है, जबकि बाह्य दृष्टि से वह अन्य राज्यों के हस्तक्षेप से मुक्त रहता है। इसलिए सम्प्रभुता को राज्य की प्रमुख विशेषता माना जाता है। 7 / 63 हॉब्स के लेवियाथन में प्रयुक्त कॉमनवेल्थ शब्द का अर्थ है- सम्प्रभु समाज, राज्य एवं सरकार के लिए सामूहिक नाम प्राकृतिक अवस्था में रहने वाले लोगों का वर्ग उपरोक्त में से कोई नहीं हॉब्स के ‘लेवियाथन’ में ‘कॉमनवेल्थ’ शब्द का अर्थ समाज, राज्य और सरकार के सामूहिक रूप से है। उनके अनुसार प्राकृतिक अवस्था में अराजकता और असुरक्षा थी, इसलिए लोगों ने सामाजिक समझौता करके एक शक्तिशाली राज्य की स्थापना की। यह राज्य व्यवस्था ‘कॉमनवेल्थ’ कहलाती है, जो शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई थी। 8 / 63 निम्नलिखित में से एक मुख्यमंत्री का राज्यपाल के प्रति कर्तव्य नहीं है? विधान विषयक प्रस्थापनाओं के बारे में सूचित करना। अपने दल की नीतियों के बारे में सूचित करना। मंत्री परिषद के सभी विनिश्चयों को सूचित करना। प्रशासन संबंधी सूचनाओं की जानकारी देना। मुख्यमंत्री के राज्यपाल के प्रति कुछ संवैधानिक कर्तव्य होते हैं, जैसे मंत्रिपरिषद के निर्णयों, प्रशासनिक कार्यों और विधायी प्रस्तावों की जानकारी देना। किन्तु अपने राजनीतिक दल की नीतियों की जानकारी देना उसका कर्तव्य नहीं है। यह दायित्व केवल शासन से संबंधित सूचनाओं तक सीमित होता है, जिससे प्रशासनिक पारदर्शिता बनी रहती है। 9 / 63 अम्बेदकर के सामाजिक व राजनीतिक दर्शन का सर्वाधिक महत्वपूर्ण पहलू क्या है? सामाजिक न्याय आर्थिक न्याय कानूनी न्याय राजनीतिक न्याय डॉ. भीमराव अम्बेडकर के सामाजिक और राजनीतिक दर्शन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू सामाजिक न्याय था। उन्होंने जाति व्यवस्था और अस्पृश्यता की कड़ी आलोचना की तथा समानता स्थापित करने के लिए संघर्ष किया। अम्बेडकर ने समाज के कमजोर वर्गों को अधिकार दिलाने और सामाजिक भेदभाव समाप्त करने पर जोर दिया। उनका उद्देश्य एक ऐसे समाज का निर्माण करना था जिसमें सभी को समान सम्मान और अवसर प्राप्त हों। 10 / 63 गाँधीजी की आत्मकथा का शीर्षक है – सत्य के साथ मेरा प्रयोग गिरि प्रवचन हिन्द स्वराज भारत की खोज महात्मा गांधी की आत्मकथा का शीर्षक ‘सत्य के साथ मेरे प्रयोग’ है। इस पुस्तक में उन्होंने अपने जीवन के अनुभवों, संघर्षों और विचारों का विस्तृत वर्णन किया है। इसमें सत्य, अहिंसा और नैतिक मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। यह आत्मकथा उनके व्यक्तित्व और दर्शन को समझने का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। 11 / 63 वोट देने का अधिकार एक- विधिक अधिकार है सामाजिक अधिकार है संवैधानिक अधिकार है व्यक्तिगत अधिकार है भारतीय संविधान के अनुच्छेद 326 में वयस्क मताधिकार का प्रावधान किया गया है, जिसके अनुसार नागरिकों को वोट देने का अधिकार प्राप्त है। 61वें संविधान संशोधन (1989) द्वारा मतदान की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी गई। यह अधिकार संविधान द्वारा प्रदान किया गया है, इसलिए इसे संवैधानिक अधिकार माना जाता है। संवैधानिक अधिकार वे होते हैं जो संविधान में निहित हों और नागरिकों को राजनीतिक प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर दें। 12 / 63 लोक सम्प्रभुता के दर्शन को सर्वप्रथम किसने प्रतिपादित किया था? लॉक रूसो मिल हॉब्स लोक सम्प्रभुता लोकतंत्र का मूल सिद्धान्त है, जिसके अनुसार अंतिम सत्ता जनता में निहित होती है। इस विचार के प्रारंभिक संकेत मध्यकालीन विचारकों जैसे मार्सिग्लियो ऑफ पेडुआ और विलियम ऑफ ओकम में मिलते हैं। किंतु इस सिद्धान्त का प्रमुख प्रतिपादक रूसो को माना जाता है, जिसने ‘सामान्य इच्छा’ को लोक सम्प्रभुता का आधार बताया और जनता को सर्वोच्च शक्ति का स्रोत माना। 13 / 63 1936 में किसने कहा गाँधीवाद जैसी कोई चीज नहीं है? महात्मा गाँधी नेहरू टैगोर मौलाना आजाद महात्मा गांधी ने 1936 में कहा था कि ‘गांधीवाद जैसी कोई चीज नहीं है’। उनका आशय यह था कि उनके विचार किसी कठोर सिद्धांत के रूप में नहीं हैं, बल्कि जीवन में अपनाए जाने वाले नैतिक सिद्धांत हैं। वे अपने विचारों को लचीला और व्यवहारिक मानते थे, इसलिए उन्होंने किसी विशेष ‘वाद’ के रूप में उन्हें स्वीकार नहीं किया। 14 / 63 भारतीय संविधान को निम्नलिखित में से कौन सी अनुसूची राज्यसभा में स्थानों के आवंटन से सम्बन्धित है? पाँचवीं अनुसूची तीसरी अनुसूची चौथी अनुसूची छठीं अनुसूची भारतीय संविधान की चौथी अनुसूची राज्यसभा में विभिन्न राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों को आवंटित सीटों से संबंधित है। इसमें प्रत्येक राज्य के प्रतिनिधित्व का विवरण दिया गया है। राज्यसभा की कुल 245 सीटों में से 233 सीटें राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों को दी गई हैं, जबकि 12 सदस्यों को राष्ट्रपति द्वारा नामित किया जाता है। यह व्यवस्था संघीय ढांचे में राज्यों के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करती है। 15 / 63 भारत एक गणराज्य है, क्योंकि – विधायिका कार्यपालिका से अधिक शक्तिशाली है। भारत एक लोकतांत्रिक देश है। केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन है। भारत में राज्याध्यक्ष (राष्ट्रपति) का निर्वाचन होता है। भारत को गणराज्य कहा जाता है क्योंकि यहाँ का राष्ट्राध्यक्ष राष्ट्रपति होता है, जिसका चुनाव किया जाता है। यह पद वंशानुगत नहीं होता। गणराज्य की विशेषता यह है कि सभी नागरिक समान होते हैं और किसी भी सार्वजनिक पद के लिए चुने जा सकते हैं। इस प्रकार भारत में लोकतंत्र के साथ गणतंत्र की व्यवस्था भी स्थापित है। 16 / 63 एक राज्य जो अपने नागरिकों को अधिकतम सामाजिक कर सुविधाएँ प्रदान करे, कहलाता है – सर्वोदय समाजवादी राज्य कल्याणकारी राज्य पुलिस राज्य कल्याणकारी राज्य वह होता है जो अपने नागरिकों के सामाजिक और आर्थिक कल्याण के लिए कार्य करता है। भारतीय संविधान के भाग-4 में नीति निदेशक तत्वों के माध्यम से इसी लक्ष्य को स्पष्ट किया गया है। इन तत्वों का उद्देश्य सरकार को ऐसी नीतियाँ अपनाने के लिए प्रेरित करना है जिससे नागरिकों को अधिकतम सुविधाएँ और न्याय मिल सके तथा समाज में समानता और कल्याण की स्थापना हो। 17 / 63 ग्राम पंचायत अपने सभी कार्यों के लिए – ग्राम सभा के प्रति उत्तरदायी है। क्षेत्र समिति के प्रति उत्तरदायी है। सरपंच के प्रति उत्तरदायी है। जिलाधिकारी के प्रति उत्तरदायी है। 73वें संविधान संशोधन (1992) के तहत पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा दिया गया। इसके अनुसार ग्राम पंचायत अपने सभी कार्यों के लिए ग्राम सभा के प्रति उत्तरदायी होती है। ग्राम सभा स्थानीय स्तर पर लोकतंत्र का आधार है, जो पंचायत के कार्यों की निगरानी और नियंत्रण करती है। इससे स्थानीय शासन में पारदर्शिता और जनभागीदारी बढ़ती है। 18 / 63 किसने कहा कि राष्ट्र दैविक आदर्श की अभिव्यक्ति एवं उसका रहस्योद्घाटन है? विपिन चन्द्र पाल बी. आर. अम्बेडकर महात्मा गाँधी अरविन्द श्री अरविन्द ने राष्ट्र को दैविक आदर्श की अभिव्यक्ति माना। उनके अनुसार राष्ट्रवाद केवल एक राजनीतिक आंदोलन नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक भावना है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र ईश्वर की इच्छा का प्रकट रूप है और इसका अपना विशिष्ट महत्व है। इस प्रकार उन्होंने राष्ट्रवाद को एक उच्च आदर्श और आस्था के रूप में प्रस्तुत किया। 19 / 63 निम्नलिखित में से किस रिट का शाब्दिक अर्थ होता है, हम आदेश देते हैं? परमादेश प्रतिषेध बन्दी प्रत्यक्षीकरण अधिकार पृच्छा ‘परमादेश’ (Mandamus) रिट का शाब्दिक अर्थ है ‘हम आदेश देते हैं’। इसके माध्यम से न्यायालय किसी सार्वजनिक अधिकारी, संस्था या सरकार को उसके वैधानिक कर्तव्यों का पालन करने या अवैध कार्यों से रोकने का आदेश देता है। यह रिट नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण साधन है और न्यायपालिका की शक्तियों को दर्शाती है। 20 / 63 निम्नलिखित में से कौन-सी पुस्तक तिलक ने नहीं लिखा है? द ओरिअन आर्कटिक होम हुन द वेदाज हिन्द स्वराज गीता रहस्य ‘हिन्द स्वराज’ पुस्तक बाल गंगाधर तिलक द्वारा नहीं, बल्कि महात्मा गांधी द्वारा लिखी गई थी। गांधीजी ने इसे इंग्लैंड से भारत लौटते समय जहाज में लिखा था। इस पुस्तक में उन्होंने आधुनिक सभ्यता की आलोचना और स्वराज के अपने विचार प्रस्तुत किए। इसलिए यह पुस्तक तिलक की रचना नहीं मानी जाती। 21 / 63 यह कौन निश्चित करता है कि कोई विधेयक वित्त विधेयक है अथवा नहीं? लोकसभा का स्पीकर भारत का वित्त मंत्री राज्य सभा का सभापति भारत का राष्ट्रपति संविधान के अनुच्छेद 110 के अनुसार यह निर्णय लोकसभा के अध्यक्ष द्वारा किया जाता है कि कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं। धन विधेयक केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है और इसमें राज्यसभा की भूमिका सीमित होती है। इस प्रकार स्पीकर का निर्णय अंतिम माना जाता है, जो विधायी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 22 / 63 राज्यसभा में विशिष्ट ज्ञान अथवा व्यवहारिक अनुभव सम्पन्न कुछ सदस्यों को मनोनीत किया जाता है। वे किस क्षेत्र के होते हैं? साहित्य कला एवं समाज सेवा विज्ञान उपरोक्त सभी राज्यसभा में कुछ सदस्यों को राष्ट्रपति द्वारा नामित किया जाता है, जो साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में विशेष ज्ञान या अनुभव रखते हैं। संविधान के अनुच्छेद 80 में इसका प्रावधान है। इसका उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को संसद में शामिल कर नीति निर्माण को समृद्ध बनाना है। 23 / 63 संविधान के कौन से अनुच्छेद में यह प्रावधान है कि राज्य नीति के निर्देशक तत्वों को न्यायालय में नहीं लाया जा सकता? अनु. 37 अनु. 400 अनु. 45 अनु. 42 संविधान के अनुच्छेद 37 में यह प्रावधान है कि राज्य के नीति-निर्देशक तत्व न्यायालय में प्रवर्तनीय नहीं हैं। अर्थात इन्हें अदालत द्वारा लागू नहीं कराया जा सकता। फिर भी ये तत्व शासन के मूल सिद्धान्त हैं और राज्य का कर्तव्य है कि वह कानून निर्माण में इनका पालन करे। ये देश में सामाजिक और आर्थिक न्याय स्थापित करने का मार्गदर्शन करते हैं। 24 / 63 निम्न में से किस मुकदमें में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान का मूल ढाँचा सिद्धान्त प्रतिपादित किया? सज्जन सिंह बनाम राजस्थान राज्य केशवानन्द भारती बनाम केरल राज्य शंकरी प्रसाद बनाम भारत राज्य गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973) के ऐतिहासिक निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने ‘संविधान के मूल ढाँचा सिद्धान्त’ को प्रतिपादित किया। न्यायालय ने कहा कि संसद संविधान में संशोधन कर सकती है, लेकिन वह उसके मूल ढाँचे को नष्ट नहीं कर सकती। इस निर्णय ने संविधान की सर्वोच्चता और उसकी मूल संरचना की रक्षा सुनिश्चित की। 25 / 63 राष्ट्रपति के चुनाव में निम्न में से कौन भाग नहीं लेता? लोकसभा के निर्वाचित सदस्य राज्य सभा के निर्वाचित सदस्य विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्य विधान परिषदों के निर्वाचित सदस्य राष्ट्रपति के चुनाव में संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य तथा राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य भाग लेते हैं। संविधान के अनुच्छेद 54 में इसका प्रावधान है। वहीं विधान परिषदों के सदस्य इस निर्वाचन में भाग नहीं लेते। इस प्रकार राष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है, जिसमें केवल निर्वाचित प्रतिनिधि शामिल होते हैं। 26 / 63 यदि सदन का सत्रावसान हो गया है, तो इसे आहूत करने के लिए कौन अधिकृत है? प्रधानमंत्री राष्ट्रपति उप-राष्ट्रपति अध्यक्ष संसद के सत्रावसान के बाद उसे पुनः आहूत करने का अधिकार राष्ट्रपति को होता है। राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों को बुलाने, स्थगित करने तथा लोकसभा को भंग करने का अधिकार रखता है। संविधान के अनुसार दो सत्रों के बीच छह महीने से अधिक का अंतर नहीं होना चाहिए। यह प्रावधान संसद की नियमित कार्यवाही सुनिश्चित करता है। 27 / 63 भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में राष्ट्रपति का सूचना का अधिकार दिया गया है? अनुच्छेद 52 में अनुच्छेद 61 में अनुच्छेद 78 में अनुच्छेद 75 में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 78 में राष्ट्रपति के सूचना के अधिकार का प्रावधान किया गया है। इसके अनुसार प्रधानमंत्री का कर्तव्य है कि वह मंत्रिपरिषद के निर्णयों, प्रशासनिक कार्यों तथा विधायी प्रस्तावों की जानकारी राष्ट्रपति को दे। राष्ट्रपति जब भी आवश्यक समझे, प्रधानमंत्री से किसी विषय पर सूचना मांग सकता है। यह प्रावधान कार्यपालिका में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित करता है। 28 / 63 निर्वाचन के बाद, सरपंच के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत किया जा सकता है – 3 माह के बाद 2 वर्ष बाद 6 माह बाद 1 वर्ष बाद निर्वाचन के बाद सरपंच के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव दो वर्ष के बाद ही लाया जा सकता है। यह प्रावधान स्थिरता बनाए रखने के लिए किया गया है, ताकि सरपंच को कार्य करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। इससे पंचायत में बार-बार अस्थिरता उत्पन्न नहीं होती और प्रशासन सुचारू रूप से चल पाता है। 29 / 63 किस संविधान संशोधन द्वारा मंत्रियों की संख्या लोकसभा की कुल संख्या की 15% निश्चित की गई? 89वाँ संशोधन 92वाँ संशोधन 90वाँ संशोधन 91वाँ संशोधन 91वें संविधान संशोधन (2003) के द्वारा मंत्रिपरिषद के आकार को सीमित किया गया। इसके अनुसार केंद्र और राज्यों में मंत्रियों की संख्या लोकसभा या विधानसभा के कुल सदस्यों के 15% से अधिक नहीं हो सकती। इस संशोधन का उद्देश्य राजनीतिक भ्रष्टाचार और अनावश्यक विस्तार को रोकना तथा शासन में दक्षता लाना है। 30 / 63 समाजवाद शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम निम्नलिखित में से किसके द्वारा किया गया? कार्ल मार्क्स रॉबर्ट ओवन लेनिन हीगल ‘समाजवाद’ शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम 1827 ई. में रॉबर्ट ओवन के विचारों के प्रचार हेतु किया गया। यह शब्द उनकी पत्रिका ‘ओ-नाइट कोऑपरेटिव’ में व्यक्तिवाद और उदारवाद के विरोध के रूप में सामने आया। बाद में 1835 में उनके नेतृत्व में स्थापित संगठन ने ‘समाज’ और ‘समाजवादी’ शब्दों को लोकप्रिय बनाया, जिससे यह विचारधारा व्यापक रूप से प्रचलित हो गई। 31 / 63 केंद्र तथा राज्यों के मध्य विवादों के अंतर्गत – संवैधानिक क्षेत्राधिकार के अंतर्गत परामर्शदात्री क्षेत्राधिकार के अंतर्गत अपीलीय क्षेत्राधिकार के अंतर्गत प्रारम्भिक क्षेत्राधिकार के अंतर्गत केंद्र और राज्यों के बीच विवादों की सुनवाई उच्चतम न्यायालय के प्रारम्भिक क्षेत्राधिकार के अंतर्गत होती है। संविधान के अनुच्छेद 131 में इसका प्रावधान किया गया है। इसके अनुसार संघ और राज्यों या दो या अधिक राज्यों के बीच उत्पन्न विवादों का निपटारा सीधे सर्वोच्च न्यायालय द्वारा किया जाता है। यह व्यवस्था संघीय ढांचे में संतुलन बनाए रखने में सहायक होती है। 32 / 63 राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाता है – विधानपालिका, न्यायालय, कार्यपालिका राजनीतिक दल, विधानपालिका, संविधान विधानपालिका, राजनीतिक दल, न्यायालय राजनीतिक दल, न्यायालय, संविधान राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने में राजनीतिक दल, विधानपालिका और संविधान की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। राजनीतिक दल जनता के विचारों को संगठित करते हैं, विधानपालिका में प्रतिनिधि उनके हितों को व्यक्त करते हैं और संविधान इस पूरी प्रक्रिया को वैधता प्रदान करता है। इस प्रकार ये तीनों मिलकर लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को प्रभावी बनाते हैं। 33 / 63 निम्नलिखित वक्तव्यों में से कौनसा संवैधानिक सरकार की प्रकृति को ठीक प्रकार स्पष्ट करता है? सीमित शासन व्यक्तियों के अधिकारों की सुरक्षा उपर्युक्त सभी व्यक्तियों के स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा संवैधानिक सरकार की प्रकृति सीमित शासन और नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा पर आधारित होती है। ऐसी सरकार संविधान के अनुसार कार्य करती है और उसके अधिकार सीमित होते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य नागरिकों की स्वतंत्रता और अधिकारों की रक्षा करना है। इस प्रकार संवैधानिक सरकार में शासन कानून के अधीन होता है और मनमानी का स्थान नहीं होता। 34 / 63 एक आधुनिक राज्य संविधान के बिना राज्य नहीं अपितु अराजकता का शासन है यह कथन किसका है? जी. बी. शॉ ए. वी. डायसी जैलीनेक लार्ड ब्राइस जैलीनेक के अनुसार संविधान के बिना आधुनिक राज्य अराजकता के समान होता है। उनका मानना था कि संविधान राज्य के संचालन के लिए आवश्यक नियम और संरचना प्रदान करता है। इसके अभाव में शासन व्यवस्था असंगठित और अव्यवस्थित हो जाएगी। इसलिए संविधान किसी भी आधुनिक राज्य की आधारशिला होता है। 35 / 63 निम्नलिखित में से कौन आत्मरक्षा का अधिकार को व्यक्ति का प्राकृतिक अधिकार मानता है? बेंथम प्लेटो हॉब्स बर्क हॉब्स के अनुसार आत्मरक्षा का अधिकार मनुष्य का प्राकृतिक अधिकार है। प्राकृतिक अवस्था में जीवन असुरक्षित और भयपूर्ण था, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए स्वतंत्र था। इस स्थिति में आत्मरक्षा सबसे महत्वपूर्ण अधिकार बन जाता है। हॉब्स ने इस अधिकार को मानव स्वभाव का मूल तत्व माना और इसे राज्य निर्माण का आधार भी बताया। 36 / 63 द्विसदनवाद निम्नलिखित शासन प्रणालियों में से किस एक की एक अनिवार्य विशिष्टता है? संघात्मक व्यवस्था संसदात्मक व्यवस्था अध्यक्षात्मक व्यवस्था एकात्मक व्यवस्था द्विसदनवाद संघात्मक शासन व्यवस्था की एक प्रमुख विशेषता है। संघात्मक व्यवस्था में शक्तियों का विभाजन केंद्र और राज्यों के बीच होता है, जिससे संतुलन बना रहता है। द्विसदनीय विधानमंडल में दो सदन होते हैं, जो कानून निर्माण में भाग लेते हैं। यह व्यवस्था विभिन्न क्षेत्रों और वर्गों के हितों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करती है। 37 / 63 निम्नलिखित में से किस अधिकार का वर्णन डॉ. अम्बेडकर ने संविधान के हृदय एवं आत्मा के रूप में किया है? सम्पत्ति का अधिकार संवैधानिक उपचारों का अधिकार समानता का अधिकार स्वतंत्रता का अधिकार डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने ‘संवैधानिक उपचारों के अधिकार’ को संविधान का ‘हृदय और आत्मा’ कहा है। यह अधिकार अनुच्छेद 32 के अंतर्गत दिया गया है, जिसके माध्यम से नागरिक अपने मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर सीधे सर्वोच्च न्यायालय जा सकते हैं। यह अधिकार अन्य मौलिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करता है और न्याय प्राप्ति का प्रभावी साधन है। 38 / 63 निम्नलिखित में से कौन प्राचीन भारतीय विचारकों द्वारा प्रतिपादित राज्य के सप्तांग सिद्धान्त के सात अंगों में नहीं है? कोष स्वामी पुर पुरोहित प्राचीन भारतीय सप्तांग सिद्धान्त के अनुसार राज्य सात तत्वों से मिलकर बना होता है—स्वामी, अमात्य, मित्र, कोष, सेना, दुर्ग और पुर। यह सिद्धान्त कौटिल्य तथा मनु द्वारा प्रतिपादित किया गया था। ‘पुरोहित’ इस सिद्धान्त के अंगों में शामिल नहीं है। इस प्रकार सप्तांग सिद्धान्त राज्य की संरचना और उसके आवश्यक तत्वों को स्पष्ट करता है। 39 / 63 प्रभुसत्ता के एकत्ववादी सिद्धान्त का प्रतिपादन निम्नलिखित में से किसने किया? ऑस्टिन मैटलैण्ड एक्वीनास ऑक ऑस्टिन ने प्रभुसत्ता के एकत्ववादी सिद्धान्त का प्रतिपादन किया। उनके अनुसार किसी समाज में एक सर्वोच्च सत्ता होती है, जिसका आदेश अधिकांश लोग मानते हैं और जो स्वयं किसी अन्य सत्ता के अधीन नहीं होती। यही सर्वोच्च सत्ता प्रभुसत्ता कहलाती है। इस सिद्धान्त में प्रभुसत्ता अविभाज्य और केंद्रीकृत मानी जाती है तथा समाज के सभी सदस्य उसके आदेशों का पालन करते हैं। 40 / 63 संयुक्त राष्ट्र का कौन सा अंग 1994 से कार्यशील नहीं है? महासभा आर्थिक व सामाजिक परिषद प्रन्यास परिषद सचिवालय संयुक्त राष्ट्र की प्रन्यास परिषद 1994 से निष्क्रिय हो गई। यह संस्था उन क्षेत्रों के प्रशासन और विकास के लिए बनाई गई थी जो उपनिवेशवाद से मुक्त हो रहे थे। पलाऊ के स्वतंत्र होने के बाद इसके कार्य लगभग समाप्त हो गए। इसलिए यह परिषद अब सक्रिय रूप से कार्य नहीं करती है, जबकि अन्य अंग अभी भी कार्यरत हैं। 41 / 63 निम्न में से कौन-सा राजनीतिक दल का आवश्यक तत्व नहीं है? संवैधानिक साधनों में विश्वास संगठन सामान्य सिद्धान्तों में सहमति विदेशों द्वारा मान्यता राजनीतिक दल के आवश्यक तत्वों में संगठन, समान सिद्धांतों में सहमति, राजनीतिक शक्ति प्राप्त करने का उद्देश्य और संवैधानिक साधनों में विश्वास शामिल हैं। विदेशी मान्यता राजनीतिक दल का आवश्यक तत्व नहीं है। लोकतंत्र में राजनीतिक दल जनता को संगठित कर शासन में भागीदारी सुनिश्चित करते हैं और नीतियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 42 / 63 सरकार का व्यवस्थित वर्गीकरण सर्वप्रथम प्रस्तुत किया गया था- मैकियावेली द्वारा मॉन्टेस्क्यू द्वारा अरस्तु द्वारा प्लेटो द्वारा सरकार का व्यवस्थित वर्गीकरण सर्वप्रथम अरस्तु ने प्रस्तुत किया था। उन्होंने शासन के विभिन्न रूपों का अध्ययन कर उनका वर्गीकरण किया। अरस्तु ने शासन के अंगों और उनके कार्यों का भी वर्णन किया, जो आधुनिक विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका से काफी मेल खाते हैं। इस प्रकार उन्होंने आधुनिक शासन प्रणाली की आधारभूत रूपरेखा प्रस्तुत की। 43 / 63 सामाजिक संविदा सिद्धान्त के अनुसार – राज्य एक मानवकृत संस्था है। राज्य की प्रकृति सावयवी है। राज्य एक नैतिक संस्था है। राज्य प्राकृतिक एवं आवश्यक है। सामाजिक संविदा सिद्धान्त के अनुसार राज्य एक मानवकृत संस्था है, जिसका निर्माण लोगों ने अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए किया। 17वीं और 18वीं शताब्दी में यह सिद्धान्त अत्यंत प्रभावशाली था। इसके अनुसार प्राकृतिक अवस्था में रहने वाले मनुष्यों ने आपसी समझौते के माध्यम से राज्य की स्थापना की, ताकि सुरक्षा, व्यवस्था और सामूहिक हितों की पूर्ति सुनिश्चित की जा सके। 44 / 63 निम्नलिखित में से कौन सा राज्य की उत्पत्ति की सही व्याख्या करता है? समझौता सिद्धान्त विकासवादी सिद्धान्त अपने सीमित रूप में उपर्युक्त सभी राज्य का दैवी सिद्धान्त राज्य की उत्पत्ति के संबंध में दैवी, शक्ति, सामाजिक समझौता, पैतृक एवं मातृक सिद्धान्त प्रस्तुत किए गए हैं, किंतु इनमें से कोई भी पूर्णतः संतोषजनक नहीं माना जाता। गार्नर के अनुसार राज्य न तो ईश्वर की देन है, न बल का परिणाम और न ही किसी समझौते की रचना है। इसलिए राज्य की उत्पत्ति को समझाने के लिए विकासवादी सिद्धान्त को सबसे उपयुक्त माना जाता है। 45 / 63 निम्नलिखित में से कौन एक राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों में सम्मिलित नहीं है? कामगारों के लिए निर्वाह मजदूरी सामान्य न्याय तथा निःशुल्क विधिक सहायता बनों तथा वन्य जीवों की रक्षा धर्म को अबाध रूप से मानने, आचरण तथा प्रचार की स्वतंत्रता राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों में सामाजिक और आर्थिक कल्याण से संबंधित प्रावधान शामिल हैं, जैसे समान न्याय, निःशुल्क विधिक सहायता, मजदूरों के लिए उचित मजदूरी तथा पर्यावरण संरक्षण। धर्म की स्वतंत्रता इन तत्वों का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह मौलिक अधिकारों के अंतर्गत अनुच्छेद 25 में वर्णित है। इसलिए यह विकल्प सही नहीं है। 46 / 63 संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत 6 वर्ष से 14 वर्ष के बच्चों की शिक्षा मौलिक अधिकार बन गई है? 93वाँ संविधान संशोधन 92वाँ संविधान संशोधन 86वाँ संविधान संशोधन 91 वाँ संविधान संशोधन 86वें संविधान संशोधन (2002) के द्वारा 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाया गया। इसके तहत अनुच्छेद 21(क) जोड़ा गया, जिसमें राज्य को इस आयु वर्ग के बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने का दायित्व दिया गया है। इस संशोधन का उद्देश्य शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करना और साक्षरता को बढ़ावा देना है। 47 / 63 नकारात्मक स्वतंत्रता की अवधारणा निम्नलिखित में से किस एक पर बल देती है? पसन्द की स्वतंत्रता स्वायत्तता हस्तक्षेप की अनुपस्थिति समानता नकारात्मक स्वतंत्रता का अर्थ है बाहरी प्रतिबंधों का अभाव। इसके अनुसार व्यक्ति को अपने कार्यों में अनावश्यक हस्तक्षेप से मुक्त रहना चाहिए। यह सिद्धान्त इस बात पर जोर नहीं देता कि व्यक्ति को सहायता दी जाए, बल्कि यह सुनिश्चित करता है कि उसे रोका न जाए। जे. एस. मिल, बेंथम, बर्लिन आदि विचारकों ने इस अवधारणा का समर्थन किया और इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता का आधार माना। 48 / 63 कौटिल्य का मण्डल सिद्धान्त किससे संबंधित है? प्रशासन विदेश नीति न्यायिक नीति आर्थिक नीति कौटिल्य का मण्डल सिद्धान्त विदेश नीति से संबंधित है। इसमें विभिन्न राज्यों के बीच संबंधों और उनके व्यवहार का विश्लेषण किया गया है। इस सिद्धान्त के अनुसार प्रत्येक राज्य अपने पड़ोसी राज्यों को शत्रु और उनके पड़ोसियों को मित्र मानता है। मण्डल का केंद्र वह राज्य होता है जो विस्तार की नीति अपनाकर अन्य राज्यों को अपने अधीन करने का प्रयास करता है। 49 / 63 संविधान की बारहवीं अनुसूची किसके कार्यों से संबंधित हैं? नगर पालिकाओं से ग्राम पंचायतों से राष्ट्रपति से प्रधानमंत्री से 74वें संविधान संशोधन (1992) के द्वारा संविधान में 12वीं अनुसूची जोड़ी गई, जो नगरपालिकाओं के कार्यों से संबंधित है। इसमें शहरी स्थानीय निकायों को 18 विषयों पर कार्य करने का अधिकार दिया गया है। इसका उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में स्थानीय स्वशासन को मजबूत करना और प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाना है। 50 / 63 किसी प्रांत के राज्यपाल को – कुछ निश्चित मामलों में विवेकाधिकार (विशेषाधिकार) है। कोई विवेकाधिकार नहीं है। बहुत व्यापक विवेकाधिकार है। उपरोक्त में से कोई नहीं है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 163 के अनुसार राज्यपाल को कुछ विशेष मामलों में विवेकाधिकार प्राप्त होता है। सामान्यतः वह मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करता है, जिसका नेतृत्व मुख्यमंत्री करता है। लेकिन कुछ परिस्थितियों में वह अपने विवेक से निर्णय ले सकता है। इसलिए यह कहा जाता है कि राज्यपाल के पास सीमित विवेकाधिकार होता है, न कि पूर्ण या शून्य। 51 / 63 प्रन्यास सिद्धान्त का प्रतिपादन किसके द्वारा किया गया? महात्मा गाँधी दादाभाई नौरोजी जवाहर लाल नेहरू स्वामी विवेकानन्द महात्मा गांधी ने ‘प्रन्यास (ट्रस्टीशिप) सिद्धान्त’ का प्रतिपादन किया। इसके अनुसार धनवान व्यक्ति अपनी अतिरिक्त संपत्ति को समाज की धरोहर मानें और उसका उपयोग समाज के कल्याण के लिए करें। गांधीजी का उद्देश्य आर्थिक असमानता को कम करना और समाज में न्याय स्थापित करना था। इस सिद्धान्त में स्वामित्व के बजाय जिम्मेदारी और नैतिकता पर बल दिया गया है। 52 / 63 निम्नलिखित में से कौन सी संस्था लोक शिकायतों से संबंधित नहीं है? उच्चतम न्यायालय योजना आयोग उच्चतर न्यायालय लोकायुक्त योजना आयोग एक गैर-संवैधानिक और परामर्शदात्री संस्था थी, जिसका मुख्य कार्य विकास योजनाओं का निर्माण करना था। इसका संबंध लोक शिकायतों के निवारण से नहीं था। इसके विपरीत लोकायुक्त और न्यायालय नागरिकों की शिकायतों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए योजना आयोग लोक शिकायतों से संबंधित संस्था नहीं माना जाता है। 53 / 63 लॉक का विश्वास था कि सम्प्रभु – समस्त कानूनों से ऊपर है। समस्त कानूनों का प्रमुखकर्ता है। विद्यमान कानूनों से बँधा हुआ है। उपरोक्त में से कोई नहीं। जॉन लॉक के अनुसार सम्प्रभुता सीमित होती है और वह विद्यमान कानूनों से बंधी रहती है। उन्होंने निरंकुश सत्ता का विरोध करते हुए कहा कि सरकार और शासक प्राकृतिक अधिकारों और कानूनों का उल्लंघन नहीं कर सकते। इस प्रकार लॉक ने मर्यादित सम्प्रभुता का सिद्धान्त प्रस्तुत किया, जिसमें जनता और सरकार के बीच संतुलन बनाए रखने पर बल दिया गया। 54 / 63 उदारवाद का मूल तत्व है – पंथ निरपेक्षता वैयक्तिक स्वतंत्रता मिश्रित अर्थव्यवस्था समानता उदारवाद का मूल तत्व वैयक्तिक स्वतंत्रता है। यह सिद्धान्त सामंतवाद के पतन के बाद विकसित हुआ और व्यक्ति की स्वतंत्रता, अधिकारों तथा गरिमा पर बल देता है। जॉन लॉक को उदारवाद का जनक माना जाता है, जिसने जीवन, स्वतंत्रता और संपत्ति को प्राकृतिक अधिकार बताया। 1688 की इंग्लैंड की गौरवमयी क्रांति को उदारवाद की विजय के रूप में देखा जाता है, जिसने लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत किया। 55 / 63 निम्नलिखित में से अनमेल बताइये – गोखले जय प्रकाश नेहरू तिलक इस प्रश्न में अनमेल विकल्प ‘नेहरू’ है। तिलक और विपिन चंद्र पाल उग्र राष्ट्रवादी थे, जबकि गोखले और दादाभाई नौरोजी उदारवादी विचारधारा के थे। जयप्रकाश नारायण समाजवादी विचार रखते थे। नेहरू लोकतांत्रिक और आधुनिक विचारों के समर्थक थे, इसलिए उनका वर्गीकरण अन्य विकल्पों से भिन्न है। 56 / 63 किस को भारत में अशांति का अग्रदूत कहा गया? लाला लाजपत राय बाल गंगाधर तिलक फिरोजशाह मेहता डब्ल्यू. सी. बनर्जी बाल गंगाधर तिलक को ‘भारत में अशांति का अग्रदूत’ कहा गया था। वे एक प्रमुख राष्ट्रवादी नेता, पत्रकार और स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने उग्र राष्ट्रवाद को बढ़ावा दिया और ब्रिटिश शासन का विरोध किया। एंग्लो-इंडियन अधिकारी वैलेन्टाइन शिरोल ने उन्हें यह उपाधि दी, क्योंकि वे ब्रिटिश शासन के विरुद्ध जनता को जागरूक कर रहे थे। 57 / 63 यह कथन कि स्वतंत्रता और समानता साथ-साथ नहीं रह सकते किससे संबंधित है? डायसी बर्लिन लार्ड एक्टन डॉरकिन लॉर्ड एक्टन का मत था कि स्वतंत्रता और समानता एक-दूसरे के विरोधी हो सकते हैं। उनके अनुसार स्वतंत्रता का अर्थ है व्यक्ति को अपनी इच्छानुसार कार्य करने की छूट, जबकि समानता सभी को समान स्थिति देने पर बल देती है। इस दृष्टिकोण में यह माना जाता है कि यदि समानता पर अधिक जोर दिया जाए तो व्यक्तिगत स्वतंत्रता सीमित हो सकती है, इसलिए दोनों के बीच संतुलन आवश्यक है। 58 / 63 आधुनिक दल व्यवस्था का उद्भव प्रथमतः कहाँ हुआ? यू. एस. ए. फ्रांस बेल्जियम इंग्लैण्ड आधुनिक दल व्यवस्था का उद्भव सर्वप्रथम इंग्लैंड में हुआ। यहाँ राजनीतिक दलों का विकास धीरे-धीरे हुआ और उन्होंने लोकतांत्रिक प्रणाली को मजबूत किया। इंग्लैंड में ही संगठित दल प्रणाली की शुरुआत हुई, जिसने बाद में अन्य देशों को भी प्रभावित किया। इस प्रकार आधुनिक राजनीतिक दलों की नींव इंग्लैंड में पड़ी। 59 / 63 भारत के उप-राष्ट्रपति को कौन पदमुक्त कर सकता है? राज्य सभा व लोकसभा दोनों निर्वाचन आयोग राज्य सभा लोक सभा भारत के उपराष्ट्रपति को पद से हटाने की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 67 में वर्णित है। इसके अनुसार राज्यसभा अपने कुल सदस्यों के बहुमत से प्रस्ताव पारित कर उपराष्ट्रपति को हटाने का निर्णय ले सकती है, जिसे लोकसभा द्वारा अनुमोदित करना आवश्यक होता है। इस प्रकार दोनों सदनों की भूमिका मिलकर उपराष्ट्रपति को पदमुक्त करती है। 60 / 63 भारतीय संविधान की दार्शनिक आधार भूमि है – संघीय संरचना राज्यनीति के निर्देशक तत्व मौलिक अधिकार प्रस्तावना भारतीय संविधान की दार्शनिक आधारभूमि उसकी प्रस्तावना में निहित है। प्रस्तावना में उन आदर्शों और मूल्यों का उल्लेख किया गया है, जिन पर संविधान आधारित है, जैसे न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व। यह संविधान निर्माताओं के उद्देश्यों और विचारधारा को स्पष्ट करती है। इसलिए प्रस्तावना को संविधान की आत्मा भी कहा जाता है। 61 / 63 निम्नलिखित में से कौन सा शब्द संविधान की प्रस्तावना में नहीं है? संघीय व्यक्ति की गरिमा बन्धुत्व न्याय भारतीय संविधान की प्रस्तावना में ‘संघीय’ शब्द का उल्लेख नहीं किया गया है। हालांकि संविधान की संरचना संघात्मक है, लेकिन यह शब्द प्रस्तावना में नहीं है। 42वें संविधान संशोधन (1976) के द्वारा प्रस्तावना में ‘समाजवादी’, ‘पंथनिरपेक्ष’ और ‘अखंडता’ जैसे शब्द जोड़े गए। इस प्रकार ‘संघीय’ शब्द प्रस्तावना का हिस्सा नहीं है। 62 / 63 निम्नलिखित में से कौन सा मार्क्सवाद से संबंधित नहीं है? वर्ग संघर्ष यद्मात्यम् इतिहास की भौतिकवादी व्याख्या अतिरिक्त मूल्य कार्ल मार्क्स ने इतिहास की भौतिकवादी व्याख्या, वर्ग संघर्ष, अतिरिक्त मूल्य तथा अलगाववाद जैसे महत्वपूर्ण सिद्धान्त प्रतिपादित किए। उनका जन्म 1818 में जर्मनी में हुआ और 1883 में लंदन में उनका निधन हुआ। मार्क्सवाद का मुख्य आधार आर्थिक संरचना और वर्ग संघर्ष है। ‘यद्मात्यम्’ नामक अवधारणा मार्क्सवाद से संबंधित नहीं है, इसलिए यह सही विकल्प नहीं है। 63 / 63 किसने सामाजिक संविदा सिद्धान्त की, घटिया इतिहास, घटिया दर्शन तथा घटिया विधि के रूप में आलोचना की? मिल हॉब हाउस लॉर्ड एक्टन सर हेनरी मेन 17वीं और 18वीं शताब्दी में सामाजिक संविदा सिद्धान्त अत्यंत लोकप्रिय था और कई विचारकों ने इसका समर्थन किया। किन्तु 19वीं शताब्दी में इसकी तीव्र आलोचना हुई। सर हेनरी मेन ने इसे ‘घटिया इतिहास, घटिया दर्शन और घटिया विधि’ कहकर इसकी सीमाओं को उजागर किया। उनके अनुसार यह सिद्धान्त वास्तविक ऐतिहासिक तथ्यों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से मेल नहीं खाता। Your score isThe average score is 51% Show more Please login to ask a question Previous Lesson Next Lesson UP TGT PYQ Test Series 2022 PYQ Test 2022 PYQ Test2013 PYQ Test 2013 PYQ Test2011 PYQ Test 2011 PYQ Test 2010 PYQ Test 2010 PYQ Test 2009 PYQ Test 2009 PYQ Test 2005 PYQ Test 2005 PYQ Test 2004 Re-Exam PYQ Test 2004 Re-Exam PYQ Test 2004 PYQ Test 2004 PYQ Test 2003 PYQ Test 2003 PYQ Test 2001 PYQ Test 2001 PYQ Test